शादी में तोरण की रस्म का तरीका और कारण – Toran marna

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तोरण मारने के रस्म शादी के समय निभाई जाने वाली कई प्रकार की रस्मों में से एक है । हम अपने रीती रिवाज और परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाते चले जाते हैं लेकिन उसका कारण या सार्थकता जानने की कोशिश नही करते। आइये जाने तोरण क्या होता है और यह रस्म क्यों की जाती है।

तोरण क्या होता है

Toran kya hota he

तोरण मारने की रस्म दूल्हा तब करता है जब वह घोड़ी पर बैठ कर दुल्हन के घर शादी के लिए आता है। यह रस्म दूल्हा घोड़े पर बैठ कर घर के द्वार में प्रवेश करने से पहले निभाता है।

तोरण लकड़ी का बना होता है जिसमे एक बड़ा तोता और दो छोटे तोते बने होते हैं। एक समय पर तोरण विशेष रूप से आर्डर देकर बनवाये जाते थे। अब ये बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। बाजार में मिलने वाले कुछ तोरण में गणेश जी या स्वास्तिक आदि बने होते हैं ।

तोरण कैसे मारते हैं

Toran kaise marte he

तोरण को डोरी की मदद से शादी वाले घर के मुख्य दरवाजे कर लटका दिया जाता है। लटकाने की सुविधा ना हो तो कोई उसे पकड़ कर दरवाजे के पास खड़ा हो जाता है। कुछ जगह पंडित जी तोरण को हाथ में लेकर यह रस्म पूरी करवाते हैं।

दूल्हा जब घोड़ी पर बैठ कर आता है तो अपने साथ तलवार या कटार लेकर आता है। इस तलवार से वह उस तोरण पर हलकी चोट करता है। कुछ दुल्हे उसे जोर से मारते हैं कुछ धीरे और कुछ सिर्फ उसे तलवार से छूते है। इस प्रकार यह रस्म करने के बाद दूल्हा दुल्हन के घर में प्रवेश करके उससे शादी करता है।

तोरण मारने की रस्म क्यों की जाती है

तोरण मारने का रिवाज कैसे शुरू हुआ इसका कोई निश्चित कारण तो नहीं बताया जा सकता लेकिन कुछ लोगों के अनुसार एक प्राचीन दन्त कथा इसकी वजह हो सकती है जो इस प्रकार है –

तोरण नाम का एक राक्षस था। जब भी किसी लड़की की शादी होने वाली होती थी तो वह तोता बनकर दुल्हन के घर के दरवाजे पर बैठ जाता था।  जब दूल्हा द्वार पर आता था तब वह राक्षस दुल्हे के शरीर में घुस जाता था और खुद दुल्हन से शादी कर लेता था। उसके बाद जीवन भर दूल्हा और दुल्हन को कई प्रकार के कष्ट देकर परेशान करता था।

एक बार एक राजकुमार जब शादी के लिए दुल्हन के द्वार पर आया तो उसकी नजर तोते पर पड़ी। उसे तोता बड़ा अचरज भरा और अशुभ महसूस हुआ । राजकुमार ने तुरंत तलवार निकली और तोते को मार दिया। इस प्रकार उस राक्षस का अंत हो गया , तब से तोरण मारने की रस्म की जाने लगी।

कुछ लोग मानते हैं कि तोरण में स्वस्तिक , गणेश जी या अन्य देवता आदि नहीं होने चाहिए क्योकि तोरण मारने के लिए तोते रूपी राक्षस पर वार करना होता है। देवता पर वार करना उचित नहीं है।

एक अन्य कथा भी प्रचलित है जो इस प्रकार है –

एक बार सुन्दर राजकुमारी थी । जब वह बहुत छोटी थी तो उसकी माँ उसे प्यार से कहती – ” मेरी चिड़िया जैसी प्यारी बेटी , तू इतने जल्दी बड़ी हो रही है ! किसी दिन कोई चिड़ा आकर तुझे ले जायेगा ” |

इस बात को वही पेड़ की डाल पर बैठा हुआ चिड़ा सुना करता था ।  यह सुनकर वह बहुत खुश होता था और अपने आप को उस समय के लिए तैयार करने लगा जब राजकुमारी असल में उसके साथ उड़ने के लिए तैयार होगी।

एक दिन उसने देखा कि राजकुमारी की शादी की तैयारियां शुरू हो गयी हैं और एक राजकुमार अपनी बारात लेकर  राजकुमारी से व्याह करने आ गया है।

चिड़ा बहुत निराश हुआ,  उसने राजा के जाकर अपनी व्यथा सुनाई |

राजा उसकी बात सुनकर हंसने लगा। उसने रानी को बुलाया और पूछा कि क्या वह ऐसा कहती थी कि कोई चिड़ा राजकुमारी को उड़ा ले जाएगा ?

रानी ने बताया कि वह प्यार में ऐसे ही अपनी बेटी से ऐसे कहती थी लेकिन उसका मतलब यह नहीं था की सचमुच का चिड़ा उसकी बेटी को ले जाये।

चिड़ा राजकुमारी को अपने साथ ले जाने के लिए अड़ गया।  राजा ने अपनी बेटी को चिडे के साथ भेजने से इंकार कर दिया। उसने चिड़िया समुदाय को इकठ्ठा कर लिया और राजा से युद्ध करने की तैयारी शुरू कर दी। राजा भी चिड़ियाओं से लडाई करने के लिए तैयार हो गया।

राजा की सेना उस युद्ध में हार गई। जब चिड़ा राजकुमारी को अपने साथ ले जाने को तैयार हुआ तो देवताओं ने हाहाकार मचा दिया। उन्होने कहा की अगर ऐसा हुआ चिड़िया और आदमी के विवाह से उत्पन्न संतान कैसी होगी ?

काफी समझाने के बाद चिड़िया प्रजाति यह मान गयी की राजकुमारी को अपने साथ ले जाने में उनकी भलाई नहीं है।

चिड़ा भी राजी हो गया कि वह राजकुमारी से शादी के लिए जिद नहीं करेगा लेकिन उसने कहा कि रानी को अपने गलत वचन और उसे धोखे में रखने की सजा तो जरूर मिलनी चाहिए । इसलिए दूल्हे को चिड़ा और उसकी प्रजाति से क्षमा मांग कर उनके पैरो के नीचे होकर गुजरना होगा। इसे सबने स्वीकार किया।

इस कहानी के अनुसार इसीलिए तोरण में लगी हुयी लकड़ी की चिड़ियाँ उस चिडे और उसकी प्रजाति को दर्शाती हैं और जब दूल्हा – दुल्हन के घर में प्रवेश करता है तो वह असल में चिडे और उसके भाई बंधुओं के पैरो के नीचे होकर निकल  रहा होता है। तोरण से कटार या तलवार लगाने का मतलब दरवाजे पर बैठी चिड़ियाओं को नमन करके जाना होता है।

हम सब चुपचाप रीति रिवाजो को मानते और पूरे करते चले जाते हैं क्योंकि सब करते हैं। इनके पीछे क्या कारण है या उसकी क्या सार्थकता है यह जानने की कोशिश कोई नहीं करता। कुछ रस्मों के पीछे बहुत रोचक या उद्देश्य पूर्ण कारण भी होते हैं।

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