वायरस क्या होते हैं और ये बीमारी कैसे फैलाते हैं समझें आसान हिंदी में – Virus and infection

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वायरस एक ऐसा सूक्ष्म प्रणाली वाला कण है जो हमें बीमार बना सकता है। यह बेक्टीरिया से भी बहुत छोटा होता है। बिना माइक्रोस्कोप इसे देख पाना संभव नहीं है। वायरस के कारण सर्दी जुकाम जैसी साधारण परेशानी से लेकर एड्स AIDS , मीजल्स , चिकन गुनिया या हर्पीज जैसी गंभीर बीमारी तक हो सकती हैं।

वायरस को कार्यरत रहने और खुद की जनसंख्या बढ़ाने के लिए जीवित कोशिका ( Host ) की जरुरत होती है। यह कोशिका इन्सान , समुद्री जीव , पशु – पक्षी , जानवर या पेड़ पौधे किसी की भी हो सकती है। अलग प्रकार की कोशिका को अलग प्रकार के वायरस प्रभावित करते हैं।

वायरस कितने प्रकार के होते हैं

वायरस की असंख्य संख्या और करोड़ों प्रजातियाँ धरती पर मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में जितने तारे हैं उनसे लाखों गुना अधिक वायरस धरती पर मौजूद हो सकते हैं। अच्छी बात यह है कि अधिकतर समुद्र में पाए जाते हैं।

कुछ वायरस सिर्फ इन्सान और कुछ सिर्फ जानवरों को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन कभी कभी जानवर वाले वायरस इन्सान को भी संक्रमित करने लगते है जिनका असर बहुत गंभीर होता है। स्वाइन फ्लू या वर्तमान कोरोना संकट ऐसे ही वायरस का कारनामा है।

वायरस बीमार कैसे करता है

जैसे हमारा शरीर और जीवन DNA पर आधारित होता है उसी प्रकार वायरस में भी DNA या RNA होते हैं। एक भी वायरस यदि हमारे शरीर में प्रवेश कर लेता है तो वह हमारी कोशिका को भेद कर उसके DNA में बदलाव कर देता है। इससे हमारी कोशिका खुद का मूल कार्य छोड़कर वायरस के आदेश अनुसार उस जैसे नए वायरस बनाने का काम शुरू कर देती है।

इससे कोशिका को नुकसान होता है वह खुद भी नष्ट हो सकती है। फिर ये वायरस उस कोशिका से बाहर निकल कर दूसरी कोशिकाओं को प्रभावित कर और अधिक वायरस का निर्माण शुरू कर देते हैं। इस प्रकार असंख्य वायरस पैदा हो जाते हैं। जो कोशिकाओं को नष्ट करके खुद की संख्या बढ़ाते जाते हैं और हम बीमार हो जाते हैं।

कुछ वायरस लीवर , कुछ श्वसन तंत्र और कुछ रक्त कोशिकाओं पर आक्रमण करते हैं। शरीर के किसी अंग जैसे लीवर या फेफड़े की कोशिकाएँ जब अधिक मात्रा में संक्रमित हो जाती हैं तो ये अंग अपना काम नहीं कर पाते। तब शरीर पर बीमारी के लक्षण नजर आने लगते हैं। जब ये संक्रमण अत्यधिक हो जाता है तो मृत्यु भी हो सकती है।

वायरस कैसा होता है

वायरस की संरचना प्रोटीन के केप्सिड नामक एक खोल और DNA या RNA जीनोम द्वारा निर्मित होती है। न्यूक्लिक एसिड जीनोम केप्सिड के अंदर समाये होते है।

कुछ वायरस में केप्सिड के बाहर भी एक झिल्लीनुमा आवरण होता है जिसे एनवलप Envelop कहा जाता है। यह अधिकतर जानवरों के वायरस में पाया जाता है।

वायरस की असंख्य प्रजातियाँ होती हैं जो कई प्रकार के शेप और आकार के हो सकते हैं। इनके जीनोम तथा होस्ट भी अलग होते हैं। वायरस के जीनोम में यह क्षमता होती है की वह जीवित कोशिका की कार्यविधि को बदल सकते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो वायरस किसी को संक्रमित नहीं कर पाते।

वायरस के कारण बीमारी कैसे फैलती है

अलग प्रकार के वायरस अलग तरह से हमारे शरीर में प्रवेश करके हमें बीमार बनाते हैं। कुछ वायरस रक्त के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रवेश कर जाते हैं जैसे एचआईवी ( HIV ) जो एड्स का कारण बनता है। कुछ वायरस छींकने या खांसने से एक से दूसरे व्यक्ति में चले जाते हैं जैसे फ्लू या कोरोना वायरस।

फ्लू और कोरोना जैसे वायरस कैसे फैलते हैं

जब संक्रमित व्यक्ति खांसता है या छींकता है तो द्रव की बूंदों के साथ वायरस हवा में तथा कुछ सतहों पर फ़ैल जाता है। यदि यह वायरस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में नाक या मुँह द्वारा चला जाता है तो वो भी बीमार हो जाता है।

द्रव की बूंदों के साथ किसी सतह जैसे रेलिंग या किसी  सामान पर यह वायरस पड़ा हो तो कुछ घंटे या कुछ दिन तक एक्टिव रह सकता है। यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति उस स्थान को हाथ लगाता है और वही हाथ अपने चेहरे पर आँख , नाक या मुंह के पास छूता है तो यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है और बीमार कर देता है।

एक संक्रमित इन्सान कई लोगों को इस तरीके से अनजाने में बीमार बना देता है। इस प्रकार बीमारी फैलती जाती है। उस वायरस की कोई दवा ना होने या प्रतिरोधक क्षमता कम होने से कई लोग की मौत हो सकती है। अक्सर बच्चे , बुजुर्ग तथा बीमार व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इससे इन लोगों को वायरस अधिक नुकसान पहुंचा देता है।

वायरस के संक्रमण से कैसे मुक्ति मिलती है

हमारे शरीर में एक शक्तिशाली प्रतिरोधक सिस्टम होता है जो वायरस जैसे हानिकारक चीजों से शरीर की रक्षा करता है। प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने पर शरीर वायरस को कुछ समय में नष्ट करके उससे मुक्ति पा लेता है तथा शरीर को अधिक नुकसान नहीं होता है।

कुछ वायरस वैज्ञानिकों द्वारा विकसित दवा अथवा टीके ( Vaccine )  द्वारा नष्ट किये जा सकते हैं जैसे टीबी , स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी दवा से ठीक की जा सकती है। एंटीबायोटिक दवाओं का वायरस पर कोई असर नहीं होता क्योंकि वे बेक्टीरिया को नष्ट करने की कार्यप्रणाली के अनुसार बनी होती हैं।

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