बच्चों के दांत निकलते समय परेशानी के घरेलु उपाय – Baby Teeth Eruption

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बच्चों के दांत Baby Teeth सामान्य तौर पर 5 -6 महीने की उम्र में निकलने शुरू हो जाते है। दांत निकलते समय बच्चों के मसूड़ों में खुजली होने लगती है जिसके कारण उन्हें परेशानी होती है। इस वजह से बच्चे चिड़चिड़े से हो जाते हैं। उन्हें समझ नहीं आता की वे क्या करें और रोते रहते है।

घर के सदस्य भी परेशान हो जाते है। यह भी संशय रहता है की बच्चे का रोना या अजीब सा व्यवहार करना दांत निकलने के कारण ही है या कोई दूसरा कारण है। यदि आपको दांत निकलने की प्रक्रिया के बारे में पता हो तो आप बच्चे की परेशानी समझ कर उसका उपाय कर सकते हैं।

बच्चों के दांत

दांत निकलते समय होने वाली परेशानी हर बच्चे में अलग हो सकती है। किसी को कम या किसी को ज्यादा परेशानी होती है। किसी किसी बच्चे को बिल्कुल परेशानी नहीं होती है।

किसी किसी बच्चे के दांत बहुत जल्द 3 महीने की उम्र में और किसी किसी बच्चे में 12 महीने की उम्र में भी दांत निकल सकते है। यह माता पिता के दांत किस उम्र में निकले थे इस पर भी निर्भर करता है।

बच्चों के दांत निकलते समय क्या होता है

कुछ सामान्य लक्षण देखकर आप पता कर सकते हैं कि बच्चे के दांत निकलने वाले है। जो इस प्रकार हैं –

—  जब भी दांत निकलने वाला होता है तो मसूड़े लाल हो सकते हैं या मसूड़े में सूजन हो सकती है या मसूड़ा कटा हुआ सा दिखाई दे सकता है।

—  इस समय दांत में खुजली चलती है। इस वजह से बच्चे हर चीज को मुंह में रख कर चबाने की कोशिश करते हैं।

—  दांत निकलने की प्रक्रिया में लार ज्यादा गिरने लगती है। हालाँकि लार गिरने के अन्य कारण भी हो सकते है।

—  जब दांत निकलता है तो रात के समय ज्यादा खुजली चलती है इसलिए बच्चे रात को ज्यादा परेशान रहते हैं।

—  दांत निकलने वाला होता है तब बच्चे बार बार कान को खींचते हैं क्योकि जबड़े में चलने वाली हलचल का असर कान तक पहुँच सकता है।

—  बच्चे को हल्का बुखार या दस्त भी हो सकते है।

शिशु के दांत कब और कैसे निकलते हैं

Baby ke teeth kab kaise aate he

सामान्यतया जब बच्चा लगभग 6 महीने का होता है तो उसके दांत मसूड़े से बाहर निकलने लगते है। हालाँकि किसी बच्चे के 3 महीने की उम्र में या किसी बच्चे में 12 महीने की आयु में भी दांत निकल सकते है। दांत निकलने के समय को लेकर टेंशन नहीं करनी चाहिए।

सबसे पहले नीचे के दो दांत आते हैं। इसके लगभग एक महीने बाद ऊपर के दो दांत आते हैं। सामान्य तौर पर बच्चों के दो दांत एक साथ निकलते हैं। समय और आयु के अनुसार दांत निकलने और गिरने का क्रम लगभग इस प्रकार होता है :

ऊपर के दांत दांत निकलने की आयु दांत गिरने की आयु
central incisor- कृन्तक 8 - 12 माह 6 - 7 साल
lateral incisor - छेदक 9 - 13 माह 7 - 8 साल
canine - भेदक 16 - 22 माह 10 - 12 साल
first molar - अग्र चर्वणक 13 - 19 माह 9 - 11 साल
second molar - चर्वणक 25 - 33 माह 10 - 12 साल
नीचे के दांत
central incisor - कृन्तक 6 - 10 माह 6 - 7 साल
leteral incisor - छेदक 10 - 16 माह 7 - 8 साल
Canine - भेदक 17 - 23 माह 9 - 12 साल
first molar - अग्र चर्वणक 14 - 18 माह 9 - 11 साल
second molar - चर्वणक 23 - 31 माह 10 - 12 साल

बच्चों के कितने दांत होते हैं

बच्चों के दांत दूध के दांत Doodh ke dant कहलाते है। इन्हे प्राइमरी टीथ या बेबी टीथ Baby Teeth भी कहते है। बच्चों के कुल 20 दांत निकलते हैं 10 दांत ऊपर और 10 दांत नीचे।

ये सारे दांत 2-3 साल की उम्र तक निकल आते हैं। ये दांत 7 -8 साल तक की उम्र तक बने रहते है। इसके बाद दूध के दांत गिर जाते हैं और उनकी जगह नए स्थायी दांत आ जाते हैं।

दूध के दांत गिरने और स्थायी दांत निकलने की प्रक्रिया 7 से 12 साल की उम्र तक चलती है। दांत टूटने का क्रम सामान्यतया वही होता है जो निकलने का होता है। सबसे पहले बीच वाले दांत टूटते हैं। मोलर टीथ यानि दाढ़ सबसे बाद में टूटती हैं।

4 साल की उम्र के बाद जबड़ा और मुंह की हड्डी के थोड़ा बड़ा होने के कारण दूध के दांतों के बीच जगह बन सकती है। यह सामान्य होता है। इसके कारण ही बड़े स्थायी दांत निकल पाते हैं। लड़कियों के दांत लड़को की अपेक्षा जल्दी निकलते हैं। नीचे के दांत पहले आते हैं फिर ऊपर के दांत आते हैं। दाएं और बाएं दो दांत साथ में निकलते हैं।

बच्चों में दूध के दांत का फायदा

Baby teeth Benefits

बच्चे के मुंह में दूध के दांत Baby Teeth उसके चेहरे का आकार सही रखते हैं। ये उसके शब्दों के सही उच्चारण करने में सहायक होते हैं। दांत से खाना चबाकर खाना खा सकने के कारण उसे उचित पोषक तत्व मिल पाते हैं। अतः इनकी साफ सफाई का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

इनके स्वस्थ रहने पर इनके टूटने के बाद आने वाले दांत भी सही रहते हैं। यदि दूध के दांत में कीड़ा लग जाये और उसका उपचार नहीं हो तो हो सकता है कि नये स्थायी दांत में भी कीड़ा लग जाये। इसलिए ये सोचकर कि दूध के दांत तो गिर जायेंगे , उनका उपचार नहीं कराने से समस्या बढ़ सकती है।

छोटे बच्चे को ब्रश कराना चाहिए या नहीं

Baby ko brush kaise karaye

छोटे बच्चों को भी दांत में दूध के कारण कीड़ा यानि केविटी की समस्या हो सकती है। अतः बच्चे के दांत निकलने पर उनकी सफाई नर्म ब्रश से जरूर करनी चाहिए।

छोटे बच्चे के लिए अलग प्रकार के टूथ ब्रश मेडिकल स्टोर पर मिलते हैं। जिससे दांत और मसूड़े दोनों की सफाई हो जाती है। बच्चा जब 2 साल का हो जाये तो उसे बच्चों के लिए मिलने वाले पेस्ट से ब्रश करा सकते हैं।

पेस्ट बहुत थोड़ा लगाना चाहिए। उसे थूकना और कुल्ली करना भी सीखा देना चाहिए। पेस्ट करने के बाद कुल्ली करने के लिए उसे 5 साल की उम्र तक आपकी मदद की जरूरत होती है ।

बच्चों के दांतों की परेशानी से बचने के उपाय

Baby teeth problem ke gharelu upay

—  दांत में खुजली चलने के कारण बच्चे कुछ भी मुंह में रख कर चबाने की कोशिश करते है। जिसके कारण गन्दगी उसके मुंह में चली जाती है। यह संक्रमण का कारण बनता है।

इसके कारण बच्चे को दस्त , बुखार , भूख में कमी आदि हो सकते हैं। इस समय इस बात का विशेष ध्यान रखें की वह कोई गन्दी चीज अपने मुंह में ना रखे। यदि इसे चबाने वाला खिलौना दिया गया है तो उसे भी साफ करके ही उसे दें तथा उसे बार बार साफ करते रहें। उसे चबाने के लिए कुछ ऐसी चीज दें जिससे उसे चोट ना लगे।

—  आयुर्वेदिक स्टोर से ” दंतोद भेदगदांतक रस ” नामक गोली ले आयें। यह गोली पीस कर शहद के साथ मिलाकर दिन में दो तीन बार मसूड़ों पर साफ अंगुली की सहायता से हलके हाथ से मलें। इससे दांत निकलने में आसानी रहती है।

—  डॉक्टर बडनेरे का टीथिंग सिरप मेडिकल स्टोर से ले आयें। ये बरसों से लोकप्रिय पुराना सिरप है जो दांत निकलते समय बहुत लाभदायक होता है। लगभग सभी मेडिकल शॉप पर यह मिल जाता है। इसे आधा आधा चम्मच सुबह शाम देने से दांत निकलते समय होने वाली परेशानी में आराम मिलता है और दांत आसानी से निकलते  हैं।

—   मसूड़ों पर दिन में तीन चार बार शहद लगाने से दांत निकलते समय परेशानी कम होती है।

—  दांत निकलने की प्रक्रिया लगभग दो साल चलती है लेकिन शुरू के दांत निकलते समय बच्चे जितना परेशान होते हैं उतने बाद में नहीं होते।

—  दांत निकलने के बाद बच्चे के दांत की सफाई शुरू कर देनी चाहिए। यह नर्म कपड़े या नर्म ब्रश से की जा सकती है।

—  रात के समय बच्चे का थोड़ा पानी पिलाकर सुलाना चाहिए ताकि उसके मुंह का दूध घुल जाये और दांत में कीड़ा न लगे।

—  यदि बच्चा दूध पीते पीते सो जाये तो दूध से उसके दांत ख़राब हो सकते हैं तथा उसके कान में इन्फेक्शन भी हो सकता है। अतः नींद आने के बाद बच्चे के मुंह से बोतल की या स्तन की निपल निकाल लेनी चाहिए।

—  दांत में होने वाली खुजली से बच्चे का ध्यान हटा कर दूसरी तरफ लगाने से कुछ देर वह उस तकलीफ को भूल सकता है। उसे नए खिलौने से या अन्य तरीके से कुछ देर बहला सकते है। इससे उसकी तकलीफ कम हो सकती है।

—  कभी कभी बीमारी से भी बच्चे चिड़चिड़े हो जाते है जिसे दांत के कारण समझने की भूल हो सकती है। अतः इसका ध्यान रखें। यदि बुखार थोड़ा बढ़ जाये 100 डिग्री से ऊपर हो जाये और दो दिन से ज्यादा रहे तो डाक्टर की मदद ले लेनी चाहिए।

—  यदि बच्चे के दांत 15 महीने की उम्र होने के बाद भी नहीं निकले तो डाक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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