गेहूं से एलर्जी के कारण , लक्षण और उपाय – Wheat allergy

गेहूं से एलर्जी Wheat allergy कई लोगों को परेशान करती है। एलर्जी होने का कारण प्रतिरक्षा प्रणाली  Immune System  का अधिक

सक्रीय हो जाना होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली हमें बाहर की नुकसानदायक चीजों से बचाने का काम करती है जैसे बैक्टीरिया , वाइरस या विषैले

तत्व आदि। कभी कभी गलती से यह प्रणाली नुकसान नहीं करने वाली चीजों को भी नुकसानदेह समझ लेती है। और उसे मिटाने की कोशिश

में ज्यादा उग्र हो जाती है। इससे शरीर को नुकसान होने लगता है। यही एलर्जी कहलाती है।

 

गेहूं से एलर्जी होने पर साँस लेने मे दिक्कत , जी  घबराना , चमड़ी पर दाने या पित्ती जैसा उभर आना , पेट फूलना , ध्यान केन्द्रित करने में

परेशानी होना आदि हो सकते हैं। कुछ लोगों को कम और कुछ लोगों को अत्यधिक दिक्कत हो सकती है।

 

गेहूं से एलर्जी बचपन में ज्यादा होती है। क्योंकि उनका पाचन तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली Immune system कमजोर होता है। 5  साल की उम्र

होने तक यह ठीक भी हो जाती है। यह बड़े लोगों में भी हो सकती है।

 

गेहूं से एलर्जी के कारण – Wheat allergy reason

 

गेहूं में कई प्रकार के तत्व होते हैं। इनमे से कुछ तत्व एलर्जी कर सकते हैं। ज्यादातर इसका कारण गेहूं में पाया जाने वाले प्रोटीन होते हैं ।

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली इन्हे बैक्टीरिया जैसा हानिकारक समझने की भूल कर सकती है। इस प्रकार के प्रोटीन सिर्फ गेहूं में ही नहीं होते बल्कि

जौ , ओटमील या अन्य अनाज में भी होते है और ऐसी कोई भी चीज जिसमे ऐसे तत्व हो उनसे परेशानी होने लगती है।

 

यदि परिवार में किसी सदस्य को हो तो गेहूं से एलर्जी हो तो यह आपको भी हो सकती है। यह अनुवांशिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में

जाने वाली परेशानी है।

 

कुछ लोगों को गेहूं का आटा साँस द्वारा अंदर जाने से एलर्जी होती है और कुछ को खाने से होती है। एलर्जी के लक्षण तुरंत भी दिख सकते हैं

और कुछ घंटों के बाद भी। गेहूं की रोटी और दलिया के अलावा , कई चीजें जो गेहूं से बनी होती हैं , ऐसी एलर्जी का कारण बन सकती हैं जैसे

ब्रेड , बिस्किट , , केक , पास्ता , नूडल्स , पिज़ा , बर्गर , आइसक्रीम का कोन , जौ से बनी हुई बीयर आदि। अतः इनका भी ध्यान रखना

चाहिये।

 

गेहूं से एलर्जी के लक्षण – wheat allergy symptom

 

अधिकतर लोगों को गेहूं से एलर्जी होने पर यह प्रभाव हो सकते हैं –

 

—  नाक बहना या नाक बंद हो जाना

—  अस्थमा

—  त्वचा पर एक्जिमा

—  त्वचा पर पित्ती जैसे उभर आना

—  सिरदर्द होना

—  जी घबराना , उलटी , दस्त आदि होना

—  गले में , मुंह में सूजन या जलन आदि होना

—  आँखों से पानी बहना या जलन होना

—  पेट फूलना

 

बहुत कम लोगों को ऐनाफाईलेक्सिस जैसी गंभीर एलर्जी भी हो सकती है तब तुरंत उचित चिकित्सा मिलना बहुत आवश्यक होता है।

इसमें यह लक्षण उभर सकते हैं –

 

—  गला भिंचता हुआ महसूस होना। गले में सूजन आना , निगलने में दिक्कत होना।

—  छाती में दर्द और भिंचाव महसूस होना और साँस लेने में दिक्कत होना।

—  त्वचा पीली या नीली पड़ जाना।

—  दिल की धड़कन कम हो जाना।

—  ब्लड प्रेशर एकदम से कम हो जाना।

 

गेहूं से एलर्जी हो तो क्या करें

 

गेहूं तथा इससे बनने वाली चीजों से कुछ समय दूर रहें और देखें की किस चीज का किस समय उपयोग करने से परेशानी होती है। हर एक

चीज लिख लें ताकि सही प्रकार से एलर्जी का विश्लेषण हो सके और उचित रूप से चिकित्सा हो सके।

गेहूं से एलर्जी हो तो जल्द से जल्द उपचार करायें । इसे अनदेखा ना करें अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है।

एलर्जी की दवा डाक्टर ने दी है तो उसे हमेशा अपने साथ रखें। कभी भी जरुरत पड़ सकती है।

 

एलर्जी के घरेलु उपाय

 

इम्युनिटी सही रखने के लिए लाइफ स्टाइल यानि खान पान और दिनचर्या में बदलाव लाकर फिट और तंदुरुस्त रहें।

योगासन और प्राणायाम आदि सीखकर इनका अभ्यास करें।

विटामिन C  युक्त आहार रोजाना पर्याप्त मात्रा में लें। सुबह एक गिलास पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर नियमित पियें।

गाजर , चुकंदर और खीरे का जूस मिलाकर नियमित पीने से एलर्जी में आराम मिलता है।

चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर और आधा चम्मच आंवला चूर्ण मिलाकर नियमित लेने से एलर्जी की परेशानी दूर होती है।

 

गेहूं से एलर्जी , ग्लूटेन इन्टोलेरेंस और सीलियक में फर्क

 

गेहूं से एलर्जी Wheat allergy , ग्लूटेन इन्टोलेरेंस तथा सीलियक Celiac नामक बीमारी ये तीनों अलग तरह की समस्या है लेकिन अक्सर

इनमें कन्फ्यूजन होने की संभावना होती है। सीलियक बीमारी में छोटी आँत में खराबी और सूजन हो जाती है। इस वजह से पोषक तत्वों का

अवशोषण कम हो जाता है। दस्त हो सकते हैं , वजन तेजी से गिर सकता है या वजन बढ़ता ही नहीं है और हमेशा पेट दर्द बना रहता है। कुछ

बच्चों को दर्द तो  नहीं होता लेकिन उनका वजन नहीं बढ़ता और कमजोरी बनी रहती है। इसकी जाँच चिकित्सक से करा लेनी चाहिये।

 

इसी प्रकार की एक अन्य समस्या होती है जिसे ग्लूटेन इन्टोलेरेंस कहते हैं। यह एलर्जी नहीं होती है बल्कि गेहूं में मौजूद ग्लूटेन नामक प्रोटीन

नहीं पचने के कारण होने वाली परेशानी होती है। जिस भी चीज में ग्लूटेन होता है उसे खाने से परेशानी होती है। ऐसे में ग्लूटेन वाली चीजों को

अवॉइड करना चाहिए।

 

( source : wheat allergy  )

 

Disclaimer : The above mentioned has been given for informational purpose only .For any treatment proper expert advice is recommended.

 

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