तड़का बघार छौंका के तरीके और फायदे – Tadka benefits

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तड़का Tadka लगा कर दाल या सब्जी में स्वाद , सुगंध और गुणों को बढ़ाया जाता है। इसे छौंका , बघार या वगार लगाना भी कहते हैं। पूरे भारत भर में तड़का लगाने का चलन है। तड़के में अलग अलग स्थान पर अलग अलग चीजों का उपयोग किया जाता है लेकिन उद्देश्य समान ही होता है।

ये सभी तड़के शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। जब एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते है तो खाने का स्वाद बिलकुल बदल जाता है जिसका कारण तड़के के इस्तेमाल की गई सामग्री का बदल जाना भी होता है। जैसे पंजाब में अलग तरह का तड़का लगाया जाता है और दक्षिण भारत में अलग तरह का ।

आइये जाने दाल सब्जी में तड़का या छौंका कैसे लगाते हैं और तड़का बघार में क्या क्या डाला जाता है।

तड़का कैसे लगाते हैं

Tadka kaise lagaye

तड़का लगाने के एक विशेष प्रकार का लंबे हैंडल वाला छोटा पैन बाजार में उपलब्ध है। इसमें थोड़ी मात्रा में ( दो तीन चम्मच ) तेल या घी गर्म किया जाता है। जब घी या तेल अच्छे से गर्म हो जाते है तब इसमें तड़का लगाने का सामान जैसे राई , जीरा या हींग आदि डालते हैं। हल्का सा तड़कने पर इसे तुरंत दाल या सब्जी में मिला दिया जाता है और ढक दिया जाता है।

एक अन्य तरीके में एक बड़े बर्तन में घी या तेल गर्म करके उसमे तड़के की सामग्री डालते है। फिर पहले से उबाल कर रखी हुई दाल इसमें मिला देते हैं।

तड़का लगाने के फायदे : Tadka Benefits

तड़का घी या तेल में लगाया जाता है जो की वसा का रूप होते हैं। दाल व सब्जियों में कई विटामिन ऐसे होते हैं जो वसा में घुलनशील होते है अतः दाल व सब्जी में थोड़ा तेल या घी मिलाने से ये विटामिन शरीर आसानी से अवशोषित कर पाता है। इसके अलावा तड़के में डाली जाने वाली प्रत्येक चीज जैसे जीरा , राई या हींग आदि भोजन के पाचन में मददगार होते है तथा गैस आदि की तकलीफ से छुटकारा दिलाते हैं।

आइये जानें अलग प्रकार के छौंका लगाने के फायदे विस्तार से ।

पंजाबी तड़का के फायदे – Panjabi Tadka

कृपया ध्यान दे : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं। 

इसमें मुख्य रूप से जीरा , लहसुन , प्याज , अदरक , हरी मिर्च  और टमाटर आदि का उपयोग किया जाता है।

जीरे में आयरन , मैंगनीज कॉपर , कैल्शियम , मेग्नेशियम , फास्फोरस , पोटेशियम , जिंक आदि खनिज तत्व होते हैं। यह  वात और कफ दोष को मिटाता है तथा कब्ज में लाभ पहुंचाता है।

अदरक पेट के लिए बहुत फायदेमंद होती है। ये पेट में गैस को रहने नहीं देती , बाहर निकाल देती है। आँतों को लचीला और सशक्त बनाती है। पेट की जलन व सूजन को मिटाती है। जी घबराने या उल्टी होने में असरकारक दवा साबित होती है।  गठिया और मासंपेशियों के दर्द आदि में इससे आराम मिलता है।

लहसुन में प्राकृतिक एंटी बायोटिक  , एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह शरीर से विजातीय पदार्थों को बाहर निकाल देता है।  इसका सेवन हार्ट , आँतों , फेफड़ों , स्किन प्रॉब्लम आदि के लिए फायदेमंद होता है। यह कील मुहांसे , फोड़े फुंसी , एसिडिटी , कब्ज

आदि को ठीक करने में मददगार होता है। पेट के कीड़े मिटाने में लहसुन विशेष प्रभावकारी होता है। यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल HDL को बढ़ाकर बुरे कोलेस्ट्रॉल  LDL  को कम करता है। सर्दी , जुकाम और खांसी में लाभदायक होता है।

हरी मिर्च पेट को ठीक रखती है और वजन नियंत्रित रखती है। प्याज रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है।

टमाटर विटामिन A  और C का अच्छा स्रोत है। यह स्वास्थ्य और सुंदरता दोनों में वृद्धि करता है।

पंच फोरन तड़का के फायदे – Panch Foran Tadka

पंच फोरन छौंके में पांच तरह के मसाले होते हैं । पंच फोरन तड़का में राई , जीरा , मेथी , सौंफ और कलौंजी डाले जाते हैं। यह राजस्थान तथा आसाम में अधिक काम में लिया जाता है। राजस्थानी कढ़ी , काशीफल , दानामेथी की सब्जी आदि में इसे डालकर उम्दा स्वाद पैदा किया जाता है। पंच फोरम बघार बहुत लाभदायक होता है।

मेथी में आयरन , कैल्शियम , पोटेशियम , मैग्नेशियम , कॉपर , मैगनीज तथा ज़िंक आदि खनिज तत्व तथा विटामिन A , विटामिन C , फोलिक एसिड विटामिन B 6 , आदि होते है जो जरुरी विटामिन हैं।

सौंफ के तत्व पाचन के लिए जरुरी एंजाइम का स्राव  तथा पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ाते हैं । यह कब्ज होने से बचाती तथा एसिडिटी मिटाती है। सौंफ में मौजूद विटामिन C , एमिनो एसिड , कोबाल्ट , मैग्नीशियम और फ्लेवोनोइड्स आदि तत्व बहुत लाभदायक होते हैं । सोंफ पेचिश , आँव  और दस्त में बहुत फायदेमंद होती है।

कलौंजी जोड़ों के दर्द में फायदा करता है तथा दाँतों को मजबूत बनाती है। सौंफ पाचक होती है और मुंह की बदबू मिटाती है।

गुजराती तड़का के फायदे – Gujrati Tadka

गुजराती खाना थोड़ा मीठा होता है। इसमें राई,  हींग , सूखी लाल मिर्च , मेथी आदि का उपयोग अधिक किया जाता है।

राई से पेट के कीड़े नष्ट होते है , गैस नहीं बनती व पाचन में सहायक होती है और यह कोलेस्ट्रॉल कम करती है।

हींग कब्ज और एसिडिटी की समस्या से निजात दिलाती है।

दक्षिण भारतीय तड़का के फायदे – South indian Tadka

दक्षिण भारतीय तड़के में राई , कढ़ी पत्ता , नारियल , चने की दाल , उड़द की दाल आदि का उपयोग होता है।

कढ़ी पत्ता  बहुत पोष्टिक होता है। यह  मैग्नेशियम ,  कैल्शियम ,फॉस्फोरस , आयरन , कॉपर आदि का स्रोत है। इसके अलावा इससे लाभदायक विटामिन जैसे  विटामिन C , विटामिन A , विटामिन B , विटामिन E  आदि प्राप्त होते है।

चना प्रोटीन , फाइबर और कैल्शियम का स्रोत होता है और उड़द की दाल भी प्रोटीन से भरपूर होती है। इसके अलावा इनमें आयरन , फास्फोरस , थायमिन , विटामिन बी 6 , मेग्नेशियम , जिंक  आदि पोषक तत्व होते हैं। इनका प्रोटीन अन्य प्रोटीन की अपेक्षा आसानी से पच जाता है।

कश्मीरी तड़का के फायदे – Kashmiri Tadka

इस छौंके में जायफल , जावित्री , फूल चक्री , लौंग , काली मिर्च , तेजपत्ता , बड़ी इलायची आदि गर्म मसाले उपयोग में लाये जाते हैं।

लौंग में एंटी फंगल , एंटीमाइक्रोबाइल  , एंटीवायरल  गुण होते हैं। यह पेट में गैस नहीं बनने देती। यदि किसी कारण से गैस बनती है तो उसे बाहर निकाल देती है। यह पेट के कीड़े नष्ट कर देती है।

दाँत में दर्द होने पर लौंग का उपयोग सभी करते हैं।  जी मिचलाना  , उल्टी होना , हिचकी आदि ठीक करने में लौंग बहुत प्रभावकारी है। इससे लीवर को शक्ति मिलती है तथा  प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह मुँह की बदबू  दूर करती है।

काली मिर्च , आँतों को भी सशक्त बनाती है और आँतों में होने वाले कैंसर आदि को रोकती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट की उच्च मात्रा होने के कारण यह त्वचा पर होने वाले दाग धब्बे और झुर्रियों आदि से बचाती है।

इसमें सर्दी जुकाम कफ आदि को मिटाने की क्षमता होती है। यह प्रदुषण , फ्लू या वायरल इन्फेक्शन के कारण गले नाक और छाती में जमा कफ को पिघला बाहर निकाल देती है

बड़ी इलायची और छोटी इलायची गैस और कोलेस्ट्रॉल को कम करती है।

तेजपत्ता हृदय के लिए अच्छा होता है। यह सर्दी और इन्फेक्शन से  भी शरीर को बचाता है।

तड़का लगाते समय ध्यान रखने योग्य बातें

—  तड़के में राई डालनी हो तो सबसे पहले राई और राई तड़कने के बाद ही अन्य सामग्री मिलाई जाती हैं।

—  हींग डालनी हो तो जीरा और हींग साथ में डाला जाता है। हींग डालने पर सामान्यतया लहसुन नहीं डाला जाता।

—  गर्म मसाले जैसे लौंग , काली मिर्च , तेजपत्ता आदि थोड़े कम तापमान पर सबसे पहले डाले जाते हैं। इसके बाद दूसरे सामान डालते हैं।

—  तड़का लगाने के सामान डालते समय तापमान अधिक हो सकता है। ऐसे में तड़का जलने की संभावना होती है। अतः शीघ्रता से उसे दाल में मिला देना चाहिए , अन्यथा स्वाद थोड़ा बदल सकता है।

—  दही वाली सब्जियों में घी का तड़का अच्छा स्वाद देता है।

 

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