पसीना ज्यादा आने के कारण और उपचार – Excess Sweating Reason And Cure

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पसीना आना sweating शरीर की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे शरीर का तापमान सन्तुलित रहता है। जब वातावरण गर्म होता है तो शरीर में मौजूद पानी त्वचा पर निकल कर शरीर को ठंडा करता है।

गर्मी के अलावा एक्सरसाइज करते समय , तनाव पूर्ण स्थिति होने पर या डर और चिंता के कारण भी पसीना आ सकता है।

पसीने pasine का काम सिर्फ त्वचा को ठंडा करना ही नहीं होता। हथेली में थोड़ी नमी होने से इसकी पकड़ मजबूत बनती है। हथेली की त्वचा कड़क होकर फटती नहीं है तथा किसी चीज को छूने पर उसे महसूस करने की काबिलियत बनी रहती है।

लोगों में यह गलतफहमी बहुत ज्यादा है की पसीने के द्वारा शरीर से विषैले तत्व शरीर से निकलते है। शरीर से विषैले तत्व सिर्फ गुर्दे और लिवर के माध्यम से निकलते है ना की पसीने के साथ। पसीने में 99 % पानी और थोड़ी मात्रा में नमक , प्रोटीन और यूरिया होते है।

पसीने का पानी हमारे शरीर में मौजूद पसीने की ग्रंथियों से निकलता है। इन्हें एक्राइन पसीना ग्रंथि Eccrine Sweat Glands कहते हैं। इंसान के शरीर पर 20 लाख से 40 लाख तक पसीने की ग्रंथियां होती है। ये ग्रंथियां पैर के तलवों , हथेली , मस्तक , गाल और काँख Armpit  में सबसे ज्यादा होती है। इसलिए इन जगहों पर स्वेटिंग ज्यादा होती है।

पसीना कितना आता है यह इस पर निर्भर करता है की पसीने की ग्रंथियां कितनी है , उनमे से सक्रिय ग्रंथियां कितनी है तथा हर एक ग्रन्थि में से कितनी मात्रा में Pasina निकलता है।

महिलाओं में पसीने की ग्रंथि पुरुषों से ज्यादा होते हुए भी उन्हें Pasina कम आता है। क्योंकि महिलाओं की ग्रंथियां कम सक्रिय होती है। जिस इंसान में जितनी ज्यादा सक्रिय ग्रंथिया होती है उसको उतना ही अधिक पसीना आता है।

ऐसा पाया गया है कि जो लोग जन्म के बाद शुरू के दो साल गर्म वातावरण में होते हैं उनकी ग्रंथिया अधिक सक्रिय होती है अपेक्षाकृत उनके जो शुरू के दो साल ठन्डे वातावरण में रहते हैं।

हमारे शरीर में दो प्रकार की पसीने की ग्रंथि होती हैं। एक्राइन ग्रंथि  Eccrine  Sweat glands  तथा एपोक्राइन  ग्रंथि Apocrine sweat glands  .

एपोक्राइन पसीना ग्रंथि काँख Armpit और जननांगों के आस पास होती हैं। एपोक्राइन ग्रन्थि त्वचा के बाल यानि रोम  के साथ जुडी होती हैं। यौवन काल में प्रवेश करने के बाद हार्मोन के बदलाव होने से ये ग्रंथिया सक्रिय होती हैं।

इनमें से गाढ़ा चिपचिपा द्रव निकलता है जो नजर नहीं आता । त्वचा पर मौजूद बेक्टिरिया इस द्रव के संपर्क में आकर तेज बदबू पैदा करते है। इसीलिए बगल से तथा जननांगों के पास ज्यादा बदबू आती है।

ज्यादा पसीना आने का कारण एक्राइन ग्रंथियां  Eccrine Sweat glands होती है। पसीने की मात्रा पर गर्मी , हार्मोन , चिंता फ़िक्र और शारीरिक मेहनत का असर पड़ता है।

ज्यादा Pasina  वैसे तो नुकसान देह नहीं होता लेकिन एकदम से बहुत ज्यादा Pasina आना किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। जैसे कभी कभी हार्ट अटेक के समय एकदम से बहुत ज्यादा पसीना आने लगता है।

पसीना ज्यादा आने के कारण – Reasons of excess sweating

गर्म वातावरण

यह पसीना आने का प्रमुख कारण है। गर्मी के कारण सभी को अत्यधिक पसीना आता ही है।

पसीने की ग्रंथिया कितनी हैं 

हर इंसान में पसीने की ग्रंथियों की संख्या अलग होती हैं। यदि आपके शरीर में पसीने की ग्रंथिया ज्यादा हैं तो निश्चित रूप से आपको Pasina ज्यादा आएगा।

शारीरिक मेहनत 

शारीरिक मेहनत जितनी ज्यादा करते है पसीना उतना जी ज्यादा आता है। जैसे एक्सरसाइज करते समय , क्योंकि इससे शरीर में गर्मी पैदा होती है। जिसे दबाने के लिए पसीने की जरुरत होती है।

चिंता , डर

किसी परेशानी , डर या चिंता के कारण ज्यादा पसीना आता है। इसीलिए परीक्षा देते समय जिस छात्र को सब कुछ आता है उसे Pasina नहीं आता लेकिन जिसे कुछ नहीं आता वह पसीने से तर हो जाता है।

मोटापा

ज्यादा वजन वाले लोगों को पसीना अधिक आता है। क्योंकी चर्बी के कारण शरीर को ठंडा करने में ज्यादा पानी की जरुरत होती है। इसके अलावा चर्बी इंसुलेटर की तरह काम करके गर्मी को अंदर ही रोक देती है। अतः ज्यादा पसीने की जरुरत पड़ती है।

पसीने के अन्य कारण

कॉफी – इसमें मौजूद कैफीन के कारण Paseena ज्यादा आ सकता है। ज्यादा पसीने से परेशान है तो कॉफी कम करनी चाहिए।

शराब – अल्कोहोल भी कैफीन जैसा ही प्रभाव डालता है। इसके कारण पसीना ज्यादा आता है।

धूम्रपान – तम्बाकू में निकोटिन होता है जो हार्मोन , त्वचा और दिमाग को प्रभावित करता है। सिगरेट बीड़ी हुक्का आदि पीने वाले लोगों को पसीना ज्यादा आता है। इसलिए Pasina आना कम करना हो तो इन्हें कम करना चाहिए।

सिंथेटिक कपड़े – सिंथेटिक कपड़ो में स्किन को हवा नहीं  लग पाती और अंदर की गर्मी बढ़ जाती है जिसके कारण पसीना ज्यादा आता है। अतः कॉटन के कपड़े पहनने चाहिए इनमे हवा पास हो पाती है अतः इनमे पसीना कम आता है।

ज्यादा पसीना यदि किसी बीमारी जैसे टी बी के कारण  , हार्मोन की समस्या जैसे थायरॉइड या मेनोपोज़ के कारण, टेंशन , चोट , इन्फेक्शन या दवा के कारण होता है तो इसे सेकंडरी हाइपर हाइड्रोसिस कहते है। जैसे एक ही हाथ में या एक ही पैर में पसीना आता हो तो इसका कारण रीढ़ की हड्डी में चोट या इन्फेक्शन हो सकता है।

चटखारेदार खाने का विचार आते ही सिर , चेहरे या या गर्दन पर पसीना आने लगे या खाते समय ज्यादा पसीना आता है चाहे आइसक्रीम ही खा रहे हो तो यह सामान्य नहीं होता। ऐसी स्थिति में सावधान रहना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श करके उचित उपचार लेना चाहिए।

( इसे भी पढ़ें : आम के शक्तिवर्धक फायदे तथा आम के पत्ते और गुठली का घरेलु नुस्खों में उपयोग )

ज्यादा पसीना आने से बचने के उपाय

Sweatning prevention

—  ऐसी परिस्थिति से बचें जिसमे पसीना ज्यादा आता हो जैसे तेज मसालेदार खाना खाने से बचें।

—  बगल में ज्यादा पसीना आता हो तो –

 ~ एंटी परिस्परेंट नियमित काम में लें।

 ~ सफ़ेद और काले रंग के कपड़े के अलावा दूसरे रंग के कपड़ों पर पसीना जल्द नजर आता है। अतः काले या सफ़ेद रंग के कपड़ों का उपयोग  बढ़ा सकते है।

~   सिंथेटिक कपड़े जैसे नायलोन आदि के बजाय कॉटन के कपड़े पहने क्योंकि सिंथिटिक कपड़े में हवा नहीं लगती इससे अंदर गर्मी बढ़ती है और पसीना ज्यादा आता है।

~   कांख या बगल में पहनने के स्वेटशील्ड मिलते है। ये पसीने को सोखकर बाहर कपड़े पर नहीं आने देते। इससे महंगे कपड़े ख़राब  होने से बच जाते है।

—  यदि पैरों में ज्यादा पसीना आता है तो –

~  मोज़े कम से कम दो बार बदलें।

~  पसीना सोखने वाला पाउडर का उपयोग करें।

~  जूते इस प्रकार के पहने जिनमे पसीना कम आता हो।

यदि सामान्य एंटी परिस्परेंट से लाभ नही हो तो अल्युमिनियम क्लोराइड वाला एंटी परिस्परेंट ट्राई किया जा सकता है। परंतु बहुत सावधानी के साथ । यह ज्यादा पावरफुल होता है। यह हाथ , पैर या बगल के लिए अच्छा काम करता है।

इसे मुह पर नहीं लगाना चाहिए आँख में जाने पर बहुत नुकसान देह हो सकता है। इसे यूज़ करने के कुछ विशेष सावधानियां रखनी पड़ती  है जो पैकेट पर लिखी होती है। उनका ध्यान रखते हुए ही इनका उपयोग करना चाहिए। इनसे लाभ नहीं हो तो स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

पैरों से बदबू  – Smell from legs

कुछ लोगों के पैरों से बहुत तेज बदबू आती है। यह बदबू अधिक समय तक जूते पहनने के बाद जूते उतारने पर ज्यादा आती है। पैरों से आने वाली बदबू का कारण एक अलग ही प्रकार के बेक्टिरिया होते है जो पैरों में नमी और गर्माहट की वजह से पैदा होते है और तेजी से बढ़ते हैं।

इससे बचने के लिए जहाँ तक संभव हो पैर सूखे रहने चाहिए। मोज़े पहनने से पहले पैरों में पाउडर लगा लेना चाहिए। हो सके तो मोज़े बदलते रहने चाहिए।  पैरों को साबुन से अच्छे से धोना चाहिए। इससे समस्या का समाधान नहीं हो तो एक बार स्किन के डॉक्टर से मिल लेना चाहिए।

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