लाल मिर्च और हरी मिर्च के फायदे – Benefits of Chilli or Mirch

मिर्च Mirchi जिसे  Chili या  Pepper  भी कहते हैं , भोजन में तीखा स्वाद लाने के लिए काम में ली जाती है। हमारी रसोई के मसालों में पिसी

हुई लाल मिर्च  Red Chili Powder का एक मुख्य स्थान होता है। किसी भी सब्जी में इसे मिलाने से सब्जी की रंगत colour और स्वाद दोनों

बढ़ जाते है। मिर्च का स्वाद एक बार जीभ पर चढ़ने के बाद इसके बिना किसी भी सब्जी में आनंद नहीं आता। मिर्च का तीखापन सिर्फ एक

स्वाद नहीं है बल्कि इसका प्रभाव दिल , दिमाग और पूरे शरीर पर पड़ता है। यह सब्जी भी है और मसाला भी।

 

 

मिर्च में बहुत से लाभदायक खनिज और विटामिन होते हैं। इसकी एक खासियत यह है कि इसे खाने से दिमाग में ख़ुशी देने वाले हार्मोन का

स्राव बढ़ जाता है। यह मूड अच्छा कर देती है। पतासी , पुचके , पानी पूरी खाने में जो आनंद आता है उसके पीछे एक बड़ा कारण उसका

तीखापन ही होता है। मिर्च का अचार भी बनता है जो बहुत स्वादिष्ट होता है और बहुत लोकप्रिय भी है।

 

मिर्च कई प्रकार की काम में ली जाती है विशेषकर लाल मिर्च Red Chilli  , हरी मिर्च Green Chilli , काली मिर्च Black pepper  ,

शिमला मिर्च Capsicum आदि। आजकल सफेद मिर्च White pepper का चलन भी बढ़ रहा है।

इनमे हरी मिर्च और लाल मिर्च अधिकतर काम में ली जाती है। इन्ही के बारे में यहाँ बताया जा रहा है।

 

हरी मिर्च को सब्जी में डालकर , तल कर या हरी मिर्च के टिपोरे बनाकर इसका आनंद लिया जा सकता है। कुछ लोग हरी मिर्च और बेसन

को मिलाकर स्वादिष्ट डिश बनाते हैं। हरी मिर्च का रंग ही समय के साथ लाल हो जाता है। लाल मिर्च को सुखा लिया जाता है। जिसे साबुत

Sabut lal mirch या पाउडर बनाकर सब्जी में डाला जाता है। शिमला मिर्च में तीखापन नहीं होता। इसे sweet pepper या bell

pepper भी कहते है। इसका एक अनोखा स्वाद बहुत रुचिकर होता है। काली मिर्च का उपयोग तीखेपन  के अलावा एक औषधि की तरह

भी किया जाता है। काली मिर्च के फायदे और इसके घरेलु नुस्खे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

भारत मिर्च का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत में पैदा होने वाली 90 % मिर्च की खपत यहीं पर हो जाती है। बची मिर्च को

एक्सपोर्ट किया जाता है। दुनिया में मिर्च का सबसे बड़ा निर्यातक देश भारत ही है । आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित गुंटूर जिले में हरी मिर्च और

लाल मिर्च का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। गुंटूर में मिर्च की बहुत बड़ी मंडी है। आंधप्रदेश ही मिर्च का सबसे बड़ा निर्यातक राज्य भी है।

मिर्च की फसल मुख्य तौर पर फरवरी मार्च में आती है। कर्नाटक तथा महाराष्ट्र में भी मिर्च अधिक पैदा होती है।

 

मिर्च के पोषक तत्व – Chilli Nutrients

 

हरी  मिर्च  Green Chili  और लाल मिर्च Red Chili में बहुत से लाभदायक पोषक तत्व पाए जाते है। मिर्च में तीखापन लाने वाला कैप्सेसिन

नामक तत्व शरीर के लिए लाभदायक होता है। मिर्च में विटामिन C , विटामिन A तथा विटामिन B6 भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें विटामिन

C  संतरे की अपेक्षा 6 गुना ज्यादा होता है। मिर्च में विटामिन E , विटामिन K ,  विटामिन बी समूह के थायमिन , राइबोफ्लेविन , नियासिन ,

तथा फोलेट भी पाए जाते हैं। इसके अलावा मिर्च से कैल्शियम , आयरन , पोटेशियम , मेग्नेशियम ,फास्फोरस , जिंक और मेगनीज भी प्राप्त

होते हैं।

 

मिर्च में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट तथा फ्लेवोनोइड्स  बीटा केरोटीन आदि होते हैं जो फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाकर

कई गंभीर बीमारियों को दूर रखने में सक्षम होते हैं।

 

मिर्च के फायदे – Chili Benefits

 

स्किन

मिर्च में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। यह विटामिन एक ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट है। यह कोलेजन के निर्माण के लिए जरुरी होता है।

कोलेजन शरीर के विभिन्न अंगों के स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होता है। विशेषकर कोलेजन ही वह तत्व होता है जो स्किन को कोमल ,

चमकदार और जवां बनाये रखता है। यह स्कर्वी नामक त्वचा रोग होने से भी बचाता है। मिर्च से मिलने वाले फीटो नुट्रिएंट्स भी स्किन पर होने

वाले चकत्ते , मुँहासे ,  झाइयाँ तथा झुर्रियों को दूर रखने में सहायक होते हैं । मिर्च में मौजूद विटामिन ई भी स्किन के लिए लाभदायक होता है।

 

हृदय

मिर्च का सेवन रक्त में होमो सिस्टेइन के लेवल को कम करता है। होमो सिस्टेइन का लेवल अधिक होने पर रक्त में थक्के बन सकते हैं तथा

हृदय रोग होने की संभावना बढ़ सकती है।  यह विटामिन बी की कमी से हो सकता है। मिर्च में विटामिन बी पर्याप्त मात्रा में होता है। मिर्च

कोलेस्ट्रॉल को कम करने का गुण भी रखती है। इसके फाइबर भी इसमें मदद करते हैं।  इससे मिलने वाला पोटेशियम दिल की धड़कन तथा

ब्लडप्रेशर को नियमित रखने में सहायक होता है। इस प्रकार मिर्च हृदय रोग से बचा सकती है।

 

तनाव

हरी मिर्च का सेवन करने से मन की उदासी दूर होती है । यह मानसिक तनाव को दूर करती है। इसमें पाया जाने वाला कैप्सेसिन तत्व एंटी

डिप्रेशन यानि अवसाद मिटाने का काम करता है। यह तत्व दिमाग में एंडोर्फिन नामक हार्मोन का स्राव बढ़ा देता है। एंडोर्फिन में दर्द निवारक

गुण भी होते हैं तथा यह यूफोरिया यानि अत्यधिक ख़ुशी महसूस कराने वाला हार्मोन होता है। इस प्रकार मिर्च का सेवन मन को प्रफुल्लित

करने में मददगार होता है।

 

पाचन तंत्र

हरी मिर्च खाने से लार ज्यादा बनती है। लार में बहुत से पाचक एंजाइम होते है तथा लार क्षारीय होती है। लार के ये गुण पाचनतंत्र के लिए

लाभदायक होते हैं। मिर्च में पाए जाने वाले फाइबर के कारण यह पेट साफ करती है। इसके सेवन से कब्ज दूर रहती है। कब्ज दूर रहने पर

बहुत सी समस्या जैसे बवासीर , एसिडिटी , भूख ना लगना आदि से बचाव हो सकता है परन्तु अधिकनहीं खाए।

 

आँखें

मिर्च में विटामिन A बहुत होता है जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक और आवश्यक होता है। विटामिन A की कमी होने नजर

कमजोर हो सकती है , उम्र बढ़ने के साथ आँख में मोतियाबिंद आ सकता है या मैकुला को नुकसान हो सकता है। अतः यह कमी नहीं होनी

चाहिए।

 

सूजन व दर्द

मिर्च में दर्द निवारक गुण होते हैं। अतः हरी मिर्च हड्डी से संबंधित परेशानी जैसे ओस्टिओ अर्थराइटिस , रूमेटोइड अर्थराइटिस आदि में

जोड़ों के दर्द और सूजन में आराम दिलाता है।

 

खून की कमी

हरी मिर्च से आयरन मिलता है । आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है और खून की कमी हो जाती है, जो एनीमिया कहलाता है।

नियमित रूप से हरी मिर्च के सेवन से खून की कमी नहीं होती। इसका विटामिन C  भोजन से आयरन तथा अन्य पोषक तत्व अवशोषित करने

में भी मददगार होता है।

 

सर्दी जुकाम

हरी मिर्च के फीटो नुट्रिएंट्स फेफड़ों में जमा कफ को हटाने में सहायक होते है। इसका सेवन करने से नाक तथा साइनस का म्यूकस मेम्ब्रेन

प्रभावित होता है। यह स्राव को पतला कर देती है। इससे सर्दी , जुकाम और अस्थमा का असर कम होता है। मिर्च का विटामिन C  प्रतिरोधक

क्षमता को भी बढ़ाता है। इससे भी सर्दी , जुकाम , खांसी  से बचाव होता है।

 

वजन

हरी मिर्च खाने से मेटाबोलिज्म बढ़ता है। इससे मिलने वाले विभिन्न विटामिन आदि तत्व भोजन के पोषक तत्वों का पूरा लाभ शरीर को पहुँचाने

में सहायक सिद्ध होते हैं। मिर्च शरीर के अतिरिक्त फैट को जलाने में मदद करती है। ये दोनों प्रक्रिया अतिरिक्त वजन नहीं बढ़ने देती है। इस

तरह मिर्च वजन कम रखने में सहायक होती है। हरी मिर्च का सेवन रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करता है। अतः डायबिटीज वालों को भी

इससे दोहरा लाभ मिल सकता है।

 

मिर्च से नुकसान – Chili ke Nuksan

 

—  बहुत तीखी मिर्च खाने से ना सिर्फ मुँह मे बल्कि पेट में भी जलन हो सकती है। लगातार रोजाना तेज मिर्च खाने से पेट में अल्सर आदि की

परेशानी भी हो सकती है। यदि ऐसा महसूस हो तो मिर्च खानी बंद कर देनी चाहिए।

—  यदि पाईल्स की समस्या हो तो मिर्च नहीं खानी चाहिए।

—  मिर्च को काटते समय इसका तीखा तत्व आपके हाथों पर चिपक जाता है। इस हाथ से यदि किसी भी स्थान जैसे आँख या त्वचा के किसी

नाजुक हिस्से को छूने पर उस जगह तेज जलन होने लगती है। अतः मिर्च काटने के बाद अपने हाथ अच्छे से धो लेने चाहिए।

—  बहुत अधिक तीखी मिर्च खाने से तंत्रिका तंत्र को नुकसान हो सकता है।

—  लाल मिर्च पाउडर से हरी मिर्च ज्यादा फायदेमंद होती है।

 

 

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