छींक क्यों आती है और सोते समय क्यों नहीं आती – Sneezing Reasons

 

छींक chhink – Sneeze

 

छींक सभी को आती है। यह अचानक आती है और इस पर कंट्रोल करना मुश्किल होता है। कुछ बाहरी कण नाक में जाकर वहाँ की

संवेदनशील झिल्ली में सरसराहट पैदा करते हैं। जुकाम होने पर भी नाक में इसी प्रकार की सरसराहट होती है। यहाँ मौजूद नर्व सेल्स

इसका संकेत दिमाग को भेजते हैं। दिमाग इसकी प्रतिक्रिया में चेहरे , गले और छाती की मांसपेशियों को सक्रीय कर देता है जिसके

फलस्वरूप ये सब मिलकर तेज हवा निकाल कर बाहरी कणों को साफ कर देते हैं। यह क्रिया ही छींक होती है।

 

छींक

 

यह फेफड़ों में से निकलने वाली हवा है जो नाक और गले के माध्यम से तेजी से निकलती है। छींक असल में प्रकृति का सफाई करने का एक

तरीका है। इस प्रक्रिया में नाक में घुसने वाले बाहरी कणों की सफाई की जाती है। जिस तरह आँख झपकने या साँस लेने की प्रक्रिया अपने आप

चलती रहती हैं पर हम चाहें तो कुछ समय  के लिए इन पर कंट्रोल कर सकते हैं। उसी प्रकार छींक की क्रिया भी अपने आप होती है पर कुछ

हद तक इस पर कंट्रोल कर सकते हैं। छींक आने की प्रक्रिया में पीछे की तरफ जीभ कुछ इस प्रकार ऊँची हो जाती है कि फेफड़ों से निकलने

वाली हवा मुँह से नहीं निकलती बल्कि नाक से निकलती है।

लेकिन मुंह पूरी तरह बंद नहीं हो पाता इसलिए कुछ हवा मुंह से भी निकलती है। नाक से निकलने वाली हवा की मात्रा  और उसकी गति अलग

अलग हो सकती है।

 

छींक आते समय शारीरिक बदलाव – Muscular changes while Sneezing

 

जब नाक के नर्व सेल्स से दिमाग को संकेत मिलते है तो दिमाग इसकी प्रतिक्रिया में शरीर की कई मांसपेशियों को एक साथ सन्देश  भेजता है।

इस वजह से शरीर की कई मांसपेशियों एक साथ मिलकर विशेष प्रकार से सक्रिय होती हैं। इसमें आँखों का बंद होना , चेहरे , छाती और

पेट की मांसपेशियां का सक्रिय होना शामिल होता हैं। कुछ मांसपेशियां शरीर को सहारा देने का काम करती हैं और कुछ इस प्रकार सिकुड़

जाती हैं कि तेज झटका लगने के कारण किसी प्रकार की चोट न लगे।

 

छींक आने के कारण –  Cause Of Sneeze

 

छींक आने के कई कारण हो सकते है। जब नाक में किसी कारण से सरसराहट सी पैदा होती है तो छींक आने लगती है। किसी अन्य कारण से

दिमाग को इस प्रकार के संकेत जाने पर भी छींक आ सकती है। छींक आने के कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं :

 

—  नाक में बाहरी कण जाने के कारण छींक आने लगती है।  बाहरी कण में धूल के कण , पराग कण , या पशु की रुसी आदि हो सकते हैं।

—  तापमान में अचानक आने वाली ठंडक छींक ला सकती है , ठंडी हवा लगने से छींक आ सकती है।

—  सर्दी जुकाम होने पर नाक की झिल्ली में सूजन आने से नाक ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। इसलिए छींक ज्यादा आती है। नाक बहने

या नाक बंद होने के कारण भी छींक आ सकती है।

—  वायरल इन्फेक्शन होने पर भी छींकें आती हैं।

—  एलर्जी के कारण भी यह हो सकता है। किसी किसी को विशेष कारण जैसे किसी गंध , पेड़ पौधे या पशु से एलर्जी होने के कारण छींक

आनी शुरू हो जाती है।

—  एकदम से चमकीली रोशनी में आने पर या सूरज की तरफ देखने पर भी छींक आने लगती है।

—  किसी किसी को एक अजीब सी समस्या होती है उन्हें खाना खाने के बाद पेट भरने का संकेत के रूप में छींक आनी शुरू हो जाती हैं।

 

छींक आने पर हवा की गति – Air speed while sneezing

 

सामान्य स्थिति में साँस लेते या छोड़ते समय हवा की गति लगभग 7  km प्रति घंटा होती है।  छींकते समय यह गति कई गुना बढ़ जाती है।

इस समय लगभग 150 km प्रति घंटे की गति से हवा छूटती है। इस तेज हवा के कारण बाहरी कण साफ हो जाते हैं।

किसी किसी को दो या तीन छींक एक के बाद एक आती चली जाती है। और किसी को सिर्फ एक दमदार छींक आती है। यह हर व्यक्ति के

लिए अलग हो सकता है जो कि प्रतिरोधक क्षमता और तंत्रिका तंत्र की कार्यविधि पर निर्भर करता है।

 

नींद में छींक क्यों नहीं आती है – No Sneezing while sleep

 

जब हम जगे हुए होते हैं तब हवा में मौजूद कण नाक में मौजूद नर्व सेल्स को उत्तेजित कर देते हैं। यहाँ से नर्व सेल्स द्वारा दिमाग को छींक

लाकर बाहरी कणों को हटा कर साफ करने का संकेत मिलता है। लेकिन रात को सोते समय दिमाग कुछ संकेतों की आवाजाही बंद कर देता

है। जिसमे नाक में होने वाले सरसराहट के संकेत भी शामिल है। इसे रेम एटोनिआ REM Atonia के नाम से जाना जाता है। क्योंकि दिमाग

तक नाक से कोई संकेत नहीं पहुंचता इसलिए दिमाग छींक लाने वाली प्रतिक्रिया भी नहीं देता। इसलिए छींक नहीं आती। यदि नाक में अधिक

परेशानी होती है तो पहले नींद खुलती है फिर छींक आ सकती है।

 

छींक को रोकना चाहिए या नहीं – Should Sneeze be stopped

 

वैसे तो किसी भी प्राकृतिक क्रिया को नहीं रोकना चाहिए । जैसे उबासी , खांसी , पाद , मूत्र या मल त्याग आदि। छींक भी एक प्राकृतिक

क्रिया है जिसे नहीं रोकना चाहिए। विशेष कर जिस समय हवा तेजी से निकलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो। यह खतरनाक हो सकता है।

इसे रोकने से साइनस या आँख की नाजुक नसों को नुकसान होने की सम्भावना हो सकती है । छींक के माध्यम से सफाई का काम होता है

इसलिए इसे रोकना वैसे भी समझदारी वाला काम नहीं होता है।

 

बीमार होने पर छींकने से हमारे शरीर में मौजूद इन्फेक्शन की कीटाणु  बाहर फेल जाते हैं जो किसी अन्य को भी बीमार कर सकते है।

अतः ऐसी अवस्था में छींकते समय बहुत ध्यान रखना चाहिए। रुमाल जरूर काम में लेना चाहिए। कुछ विशेष प्रकार के नाक के ऑपरेशन

के बाद डॉक्टर कुछ समय सिर्फ मुंह से छींकने की सलाह देते हैं।

 

छींक रोकने के उपाय – How to stop sneeze

 

यदि बहुत आवश्यक हो जैसे इंटरव्यू या बहुत महत्वपूर्ण मीटिंग चल रही हो और छींक आने जैसा लगे तो समय से पहले उसे रोका भी जा

सकता है। छींक रोकने के उपाय इस प्रकार हैं :

 

—  इसके लिए नाक के नीचे अंगुली आड़ी लगा दें। इससे दिमाग की तरफ जाने वाले सन्देश गड़बड़ा जाते है और छींक रुक जाती है।

—  कुछ समय मुंह से साँस लेने से नाक में सरसराहट कम होकर छींक रुक सकती है।

 

छींक लाने का उपाय  – How to sneeze

 

यदि ऐसा लगे की छींक आएगी लेकिन बार बार यह रुक जाये तो मुंह बंद करके नाक से ही साँस लें। इससे नाक की नर्व सेल उत्तेजित होकर

जल्दी ही छींक ले आयेंगी ।

 

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